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Hindi
Muhavre (हिंदी मुहावरे)
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Sr. No.
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हिंदी मुहावरे
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अर्थ
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वाक्य में प्रयोग
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1
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अपने पाँव में आप कुल्हाड़ी मारना
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जानबूझकर मुसीबत में पड़ना
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तुमने तो अपने पाँव में आप ही
कुल्हाडी मारी है, अब मुझे क्यों दोष देते हो?
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2
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अढ़ाई चावल की खिचड़ी अलग पकाना
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अलग रहना
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कुछ वर्ष पहले पाकिस्तान अढ़ाई चावल
की खिचडी अलग पका रहा था
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3
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अपना सा मुँह लेकर रह जाना
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किसी काम में असफल होने पर लज्जित
होना
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जब वह निर्दोष श्याम को मुकदमे में
नहीं फसा सका तो अपना सा मुँह लेकर रह गया
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4
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अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना
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अपनी बड़ाई आप करना
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अपने मुँह मियाँ मिट्लू बननेवाले को
समाज में इज्जत नहीं मिलती
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5
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अरमान निकालना
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हौसला पूरा करना
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बेटें की शादी में बाबू साहब ने
अपने दिल के अरमान निकाले
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6
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अरमान रहना (या रह जाना)
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इच्छा पूरी न होना
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इकलौते बेटे के अचानक मर जाने से उस
गरीब के सारे अरमान रह गये
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7
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आँख उठाकर न देखना
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ध्यान न देना, तिरस्कार करना
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मैं उनके पास काम के लिए गया था, परंतु उन्होंने
भुझे आँख उठाकर भी न देखा
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8
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आँख का काँटा होना
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खटकना, शत्रु होना
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अपनी काली करतूतों के कारण वह
पड़ोसियों की आँख का काँटा हो गया है
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9
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आँख का काजल चुराना
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सफाई के साथ चोरी करना
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इतने लोगों के बीच से घड़ी गायब !
चोर ने तो जैसे ऑखों का काजल ही चुरा लिया है
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10
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आँख का तारा, आँख की पुतली
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बहुत प्यारा
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यह बच्चा मेरी आँखों का तारा है
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11
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आँख दिखाना
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क्रोध से देखना, रोकना, धमकाना
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गलती भी करते हो और ऊपर से ऑखें भी
दिखाते हो
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12
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आँखों में धूल झोंकना
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सरे आम धोखा देना
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परीक्षक की आँखों में धूल झोंककर
कुछ विद्यार्थी अच्छे अंक तो पा जाते हैं, परंतु इससे
उन्हें जीवन में सफलता नहीं मिलती
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13
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आँखों पर चढ़ना
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पसंद आ जाना, किसी चीज के लिए
लोभ होना
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तुम्हारी घड़ी चोर की आँखों पर चढ़
गयी थी, इसलिए मौका पाते ही उसने चुरा ली
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14
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आखें फेर लेना
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पहले जैसा व्यवहार न रखना
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जब से उसे अफसरी मिली है, उसने माँ बाप, यार दोस्त सबसे
आँखें फेर ली है
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15
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ऑखें बिछाना
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प्रेम से स्वागत करना, बाट जोहना
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तुम्हारी राह में आँखें बिछाये कय
से बैठा हूँ तुम जल्द आ जाओ
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16
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आँख में पानी न होना
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बेहया, बेशर्म होना
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बेईमान लोगों की आँखों में पानी
नहीं होता
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17
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आँखों में खून उतरना
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अत्यधिक क्रोध होना
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जयचंद को देखते ही महाराज पृथ्वीराज
की आँखों में खून उतर आया
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18
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आँखों में गड़ना (या चुभना)
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बुरा लगना, पसंद आना
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तुम्हारी कलम मेरी आँखों में गड़
गयी है, इसे तुम मुझे दे दी
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19
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आँखों में चरबी छाना
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घमंड होना
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दौलत हाथ में आते ही उसकी आँखों में
चरबी छा गयी और वह अपने रिश्तेदारों से बुरा व्यवहार करने
लगा
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20
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आँखे लाल करना
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क्रोध से देखना
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आँखें लाल मत करो, इससे मैं
डरनेवाला नहीं
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21
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आँखे सेंकना
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दर्शन का सुख उठाना
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बहुत से नवयुवक तो मेले ठेले में
सिर्फ आँखे सेंकने ही आते हैं
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22
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आँच न आने देना
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थोड़ा भी आघात न होने देना
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इस झमेले में मेरे दोस्त रवि ने मुझ
पर जरा सी भी आँच न आने दी
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23
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आटे दाल का भाव मालूम होना
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कठिनाइयों का ज्ञान होना
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तुम्हारे ऊपर जब जिम्मेवारियाँ
आयेंगी तभी तुम्हें ऑटे दाल का भाव मालूम होगा
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24
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आँसू पीकर रह जाना
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दु:ख अपमान को बर्दास्त कर लेना
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सबके सामने जली कटी सुनकर भी वह
आँसू पीकर रह गया
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25
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आकाश के तारे तोड़ लाना
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असंभव काम करना
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तुम्हें नौकरी क्या मिली, लगता है आकाश के
तारे तोड़ लाये हो
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26
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आकाश पाताल एक करना
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खूब परिश्रम करना
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तुम्हें नौकरी दिलाने के लिए विकास
ने आकाश पाताल एक कर दिया था
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27
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आग पर पानी डालना
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शांत करना
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दोनों मित्रों के बीच काफी गरमा
गरमी हो गयी थी, पर दीदी की बातों ने आग पर पानी डाल दिया
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28
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आग में घी डालना
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झगड़ा बढ़ाना
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रमेश, तुम गोवर्धन की बातों में मत आना, उसका तो काम ही
है आग में घी डालना
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29
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आग में कूदना
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जानबूझकर मुसीबत में पड़ना
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साहसी व्यक्ति खतरों से डरते नहीं, वे आग में भी कूद
पड़ते हैं
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30
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आग बबूला होना
|
बहुत क्रुध होना
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राम की अनाप शनाप बातें सुनकर मोहन
आग बबूला हो गया
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31
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आग लगने पर कुआँ खोदना
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विपत्ति आ जाने पर प्रतिकार का उपाय
खोजना
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बीमारी की इस अंतिम अवस्था में दूर
शहर से डॉक्टर बुलाने की बात सोचना आग लगने पर कुआँ खोदने जैसा
है
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32
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आटा गीला करना
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घाटा लगाना
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औने पौने दामों में इन्हें बेचकर
क्यों अपना आटा गीला कर रहे हो ?
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33
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आधा तीतर आधा बटेर
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बेमेल, बेढंगा
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पश्चिमी सभ्यता ने भारतीय सभ्यता
संस्कृति को आधा तीतर आधा बटेर बना दिया है
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34
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आपे से बाहर होना
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क्रोधित होना
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इतनी सी बात प ही मास्टर साहब आपे
से बाहर
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35
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आबरू पर पानी फिरना
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प्रतिष्ठा नष्ट होना
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तुम्हारी बेवकूफी के कारण ही मेरी
आबरू पर पानी फिर गया
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36
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आवाज उठाना
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विरोध करना
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सरकार के खिलाफ आवाज उठाना एक
साधारण बात हो गयी है
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37
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आसमान सिर पर उठाना
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उपद्रव करना
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इतनी छोटी सी बात पर उसने आसमान सिर
पर उठा लिया था
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38
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आसमान से बातें करना
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बहुत ऊँचा होना
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देवघर के मंदिर का शिखर आसमान से
बातें कर रहा है
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39
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आस्तीन का साँप
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मित्र के रूप में शत्रु
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उस पर कभी भरोसा मत करना, वह तो आस्तीन का
साँप है
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40
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इधर उधर करना
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टालमटोल करना
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अब ज्यादा इधर उधर करना बंद करो, चुपचाप मेरी पुस्तक
मुझे लौटा दो
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41
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इधर की दुनिया उधर होना
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अनहोनी बात होना
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चाहे इधर की दुनिया उधर हो जाय, मैं तुम्हारे
यहाँ नहीं जानेवाला हूँ
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42
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इधर की उधर करना
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चुगली करना
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उसके सामने यह सब क्यों कहते हो ? उसकी तो आदत ही
है इधर की उधर करने की
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43
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ईट से ईट बजान
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अंतिम दम तक लड़ना, बर्बाद करना
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मैं उसकी ईंट से ईट बजा ट्रॅगा, पर हार नहीं
मानूगा
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44
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ईंट का जवाब पत्थर से देना
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दुष्टों के साथ दुष्टता का व्यवहार
करना
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वे लोग हमारे आदमियों को पीटकर
तीसमार खाँ बने घूमते हैं, पर यह नहीं जानते कि
हमें भी ईंट का जवाब पत्थर से देना आता है
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45
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ईद (दूज) का चाँद होना
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मुश्किल से दिखाई देना
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बहुत दिनों से मिले नहीं मोहन, तुम तो आजकल ईद
का चाँद हो गये हो
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46
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उड़ती खबर
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अफवाह
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यह उड़ती खबर है, इस पर विश्वास पत
करना
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47
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उल्लू का पट्ठा
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निरा बेवकूफ
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उस जैसा उल्लू का पट्ठा भी कहीं
अक्ल से काम लती हैं |
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48
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उल्लू बनाना
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बेवकूफ बनाना
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उसे तुम उल्लू नहीं बना सकते, वह बड़ा चतुर है
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49
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उल्लू सीधा करना
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काम निकालना
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नेताजी की खुशामद करके आखिर उसने
अपना उल्लू सीधा कर ही लिया
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50
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उधेड़बुन में पड़ना
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सोच विचार में पड़ना
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अचानक किसी समस्या के आ जाने पर कोई
भी व्यक्ति उधेड़ बन में पड़ जाता है
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51
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उल्टी गंगा बहाना
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असंभव काम करना
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इस गदहे को पढ़ाना उल्टी गंगा बहाने
के समान है
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52
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उल्टे अस्तुरे से मूड़ना
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मूर्ख बनाकर ठगना
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उस ठग ने आज मुझे उल्टे अस्तुरे से
मूड़ लिया
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53
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उँगली पकड़कर पहुँचा पकड़ना
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थोड़ा सा लेकर पूरा लेने की इच्छा
करना
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‘मोहनलाल से सावधान रहना ही अच्छा है, वह उँगली पकड़कर पहुँचा पकड़नेवाला आदमी है
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54
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उँगली पर नचाना
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वश में करना
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आपके अधीन हूँ इसका मतलब यह नहीं है
कि आप हर समय मुझे ऊँगली पर नचाते रहें
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55
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न उधी का लेना न माधो का देना
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किसी से कोई संबंध नहीं रखना
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चाहे जो कहो, श्याम है खरा
आदमी वह न ऊधी का लेता है न माधी को देता है
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56
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एँड़ी चोटी का पसीना एक करना
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बहुत मेहनत करना
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इस काम को समय पर पूरा करने के लिए
उसे एँड़ी चोटी का पसीना एक करना पड़ा है
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57
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एक आँख न भाना
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जरा भी अच्छा न लगना
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अपनी बेटी के साथ तुम्हारा ऐसा
दुव्र्यवहार मुझे एक आँख भी नहीं भाता है
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58
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एक एक ग्यारह होना
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एकता के सूत्र में बँधकर शक्तिशाली
होना
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शत्रुओं ने दोनों भाइयों को खूब
सताया, लेकिन अब वे दोनों भाई मिलकर एक एक ग्यारह हो गये हैं अब
वे अपने शत्रुओं का डटकर मुकाबला करेंगे
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59
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एक टाँग (पैर) पर खड़ा रहना
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काम करने के लिए सदा तैयार रहना
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जब तक बहन की शादी सम्पन्न नहीं हुई, भूषण एक टाँग पर
खड़ा रहा
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60
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एक लाठी से हाँकना
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सबके साथ एकसमान व्यवहार करना
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सबको एक लाठी से हाँकना बुद्धिमानी
नहीं है
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61
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एक हाथ से ताली न बजना
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बिना सहयोग के काम का नहीं होना
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एक हाथ से ताली नहीं बजती, गलती दोनों ने की
है
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62
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ऐसी तैसी करना
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बेइज्जत करना
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सब के सामने ही देवेंद्र ने अपने
बड़े भाई की ऐसी तैसी कर दी
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63
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ओखल में सिर देना
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जान बूझकर मुसीबत में पड़ना
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जब ओखल में सिर दे दिया है, तब मूसल की क्या
परवाह
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64
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औधी खोपड़ी का होना
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मूर्ख होना
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उसे समझाना ही बेकार है, वह बिल्कुल औधी
खोपड़ी का आदमी है
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65
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औधे मुँह गिरना
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बुरी तरह धोखा खाना
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इस बार की खरीदारी में बेचारे की एक
न चली, उलटे वह औधे मुँह गिरा
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66
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कटक बनना
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बाधक होना
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तुम तो मेरे हर काम में कटक बन जाते
हो
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67
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ककड़ी खीरा समझना
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महत्वहीन समझना
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वे गरीब हैं तो क्या हुआ, आदमी तो हैं, उन्हें तुम ककड़ी
खीरा मत समझा करो
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68
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कटे (जले ) पर नमक छिड़कना
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दु:ख बढ़ाना
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बेचारी एक तो ऐसे ही दुखों से
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69
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कफन सिर से बाँधना
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मौत या खतरे की परवाह नहीं करला
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बहुतेरे नवयुद्ध कफन सिर से बाँधकर
आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे
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70
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कमर कसना
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तैयार होना
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यदि युद्ध में विजय चाहते हो तो
मरने मारने के लिए कमर कस लो
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71
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कमर टूटना
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उत्साहहीन होना, असहाय होना
|
सीमा संघर्ष में अपने सैनिक साज
सामान को बर्बाद होते देखकर पाकिस्तानी फौज की कमर ही टूट गयी
|
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72
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कलेजा का टुकड़ा
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बहुत प्यारा
|
सौमित्र अपनी माँ के कलेजे का
टुकड़ा था
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73
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कलेजा चीरकर दिखाना
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पूरा विश्वास देना, कोई कपट न रखना
|
तुम्हारे लिए दिल में कितना प्यार
है, यह मैं कलेजा चीरकर दिखा सकता हूँ
|
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74
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कलेजा टूक टूक होना
|
बहुत दु:ख होना
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कैकेयी की बात सुनते ही महाराज दशरथ
का कलेजा टूक टूक हो गया
|
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75
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कलेजा ठंढा होना
|
संतोष होना
|
राम के वन जाते ही दासी मंथरा का
कलेजा ठंढा हा गया
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76
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कलेजा थामकर रहना
|
मन मसोसकर रहना
|
परशुराम की जली कटी बातें सुनकर
लक्ष्मण को बहुत क्रोध हुआ, किंतु श्री राम के
समझाने बुझाने पर वे कलेजा थामकर रह गये
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77
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कलेजा निकालकर रख देना
|
सच्ची बात कह देना
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मैंने कलेजा निकालकर रख दिया, फिर भी तुम्हें
विश्वास नहीं होता ?
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78
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कलेजा मुँह को आना
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घबराना
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उसकी विपत्ति की कहानी सुनकर कलेजा
मुँह को आ जाता है
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79
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कलेजे पर साँप लोटना
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ईष्या या जलन होना
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मेरी तरक्की देखकर उसके कलेजे पर
साँप लौट गया है, इसलिए उसने मेरे बारे में गलत प्रचार करना शुरू कर
दिया है
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80
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काठ की हाँड़ी
|
अस्थायी चीज
|
इस बार तो तुम्हारी चाल सफल हो गयी, लेकिन काठ की
हाँडी बार बार चूल्हे पर नहीं चढ़ती
|
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81
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कान ऐंठना
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सुधरने की प्रतिज्ञा करना
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मैं कान ऐंठता हूँ कि अब ऐसे गलत
काम कभी नहीं करूंगा
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82
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कान काटना
|
मात करना
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बुद्धि में तो वह वृहस्पति के भी
कान काटता है
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83
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कान पर जूं न रेंगना
|
कुछ भी ध्यान न देना
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मैं इतनी देर से चिल्ला रहा हूँ, लेकिन तुम्हारे
कान पर जू तक नहीं रेंगती
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84
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कान भरना
|
शिकायत करना
|
आज कई दिनों से वह मुझसे बात तक
नहीं करता, लगता है कि किसी ने मेरे विरुद्ध उसके कान भर दिये हैं
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85
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कान में तेल डालकर बैठना
|
ध्यान न देना
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इतनी देर से बुला रहा था, लेकिन तुम तो कान
में तेल डालकर बैठे थे
|
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86
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काम आना
|
वीरगति को प्राप्त होना
|
नेप्फा की लड़ाई में चीन के बहुतेरे
सिपाही काम आये
|
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87
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काम तमाम करना
|
मार डालना
|
शिवाजी ने अपने बघनखे से अफजल खाँ
का काम तमाम कर दिया
|
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88
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कीचड़ उछालना
|
निंदा करना, बदनाम करना
|
भले आदमियों पर व्यर्थ कीचड़ उछालने
की तो उसकी पुरानी आदत है
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89
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कील काँटे से दुरुस्त होना
|
अच्छी तरह से तैयार होना
|
आज मैं अपना काम पूरा था किये बगैर
नहीं रहूँगा, क्योंकि आज मैं कील काँटे से दुरुस्त होकर आया हूँ
|
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90
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कुएँ में भाँग पड़ना
|
सब की बुद्धि मारी जाना
|
किस किस को समझाया जाय यहाँ तो कुएँ
में ही भाँग पड़ी है
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91
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कुत्ते की मौत मरना
|
बुरी तरह मरना
|
अगर तुम्हारी ऐसी ही आदतें बनी रहीं, तो तुम कुत्ते की
मौत मरोगे
|
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92
|
कुम्हड़े की बतिया
|
कमजोर आदमी
|
रमेश ने नरेश को बिल्कुल कुम्हड़े
की बतिया ही समझ लिया है, बात बात में उसे
धमकाते रहता है
|
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93
|
कुहराम मचाना
|
खूब रोना पीटना
|
बंगाली बाबू की मौत की खबर आते ही
उनके घर में कुहराम मच गया
|
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94
|
कौड़ी का तीन होना
|
बहुत सस्ता होना, बेकदर होना
|
तुम जैसे आवारा के साथ रहकर वह भी
कौड़ी का तीन हो गया
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95
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खबर लेना
|
दंड देना, देखभाल करना
|
रामप्रसाद, तुम्हारी काफी
शिकायतें सुनने को मिल रही हैं, आज शाम को मैं तुम्हारी
खबर लुंगा
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96
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खाक उड़ाते फिरना
|
भटकना
|
अपनी सारी जमा पूँजी बर्बाद करके अब
वह खाक उड़ाते फिर रहा है
|
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97
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खाक में मिलना
|
बर्बाद हो जाना
|
खुदा की बुराई करोगे तो खाक में मिल
जाओगे
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98
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खिलखिला पड़ना
|
खुश होना, खुलकर हँस पड़ना
|
खिलौनों को देखते ही गुड़िया रानी
खिलखिला पडी
|
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99
|
खुशामदी टट्टू होना
|
चापलूस होना
|
तुम्हारी क्या तुम तो खुशामदी टट्टू
हो, किसी न किसी तरह अपना काम करवा ही लोगे
|
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100
|
खून की नदी बहाना
|
बहुत मार काट करना
|
क्रूर नादिरशाह ने दिल्ली में खून
की नदी बहा दी थी
|
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101
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खून खौलना
|
बहुत क्रोध होना
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दु:शासन द्वारा द्रौपदी को अपमानित
होते देखकर भीम का खून खौलने लगा
|
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102
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खेत आना
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लड़ाई में मारा जाना
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1971 के युद्ध में पाकिस्तान के हजारों सैनिक खेत आये
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103
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ख्याली पुलाव पकाना
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बेसिर पैर की बातें करना, असंभवं बातें
सोचना
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कुछ काम भी करोगे या सिर्फ ख्याली
पुलाव ही पकाते रहोगे ?
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104
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गड़े मुर्दे उखाड़ना
|
पुरानी बातें सामने लाना
|
मेरा काम गड़े मुर्दे उखाड़ना नहीं
है, लेकिन पूरी बात समझाने के लिएँ इस घटना का इतिहास तो मुझे
बताना ही होगा
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105
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गड्ढे खोदना
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दूसरे के नुकसान के लिए जाल बिछाना
|
जो दूसरों के लिए गड्ढे खोदता है, वह उसमें खुद
गिरता है
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106
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गहरी छनना
|
गाढ़ी मित्रता होना
|
इन दिनों राम और श्याम में गहरी छन
रही है
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107
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गाँठ बाँधना
|
अच्छी तरह याद रखना
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पिताजी की सीख गाँठ बाँध लो, नहीं तो बाद में
बहुत पछताओगे गाँठ का पूरा होना
|
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108
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गिरगिट की तरह रंग बदलना
|
बहुत जल्दी जल्दी विचार बदलना
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उसकी बात का क्या भरोसा ? वह तो गिरगिट की
तरह रंग बदलता रहता है
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109
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गुड़ गोबर करना
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बना बनाया काम बिगाड़ देना
|
बड़ी मुश्किल से मैंने उसे इस काम
के लिए तैयार किया था, लेकिन तुम्हीं ने आकर सारा गुड गोबर कर दिया
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110
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गुल खिलाना
|
अनोखे काम करना
|
ऐन मौके पर उसने ऐसा गुल खिलाया कि
लोगों के होश गुम हो गये
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111
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गाजर मूली समझना
|
छोटा या कमजोर समझना
|
हम अपने दुश्मनों को गाजर मूली
समझते हैं
|
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112
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गोटी लाल होना
|
लाभ होना
|
तुम्हारी क्या, अब तो तुम्हारी
गोटी लाल हो रही है
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113
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गोली मारना
|
उपेक्षा से त्याग देना
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बेकार की बातों की गोली मरो, अपने काम में मन
लगाओ
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114
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गोलमाल करना
|
गड़बड़ करना
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बड़ा बाबू आफिस में बहुत दिनों से
कुछ गोलमाल कर रहे थे, आज पकड़ में आये हैं
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115
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घड़ों पानी पड़ जाना
|
अत्यधिक शर्मिदा होना
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उसने काम ही ऐसा किया है कि जब भी
मैं उसकी चर्चा करता हूँ, मूझ पर घड़ों पानी पड़
जाता है
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116
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घर का न घाट का
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एकदम बेकार, अनुपयोगी
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इधर नौकरी छूटी उधर पिताजी का साया
सिर से उठ गया, बेचारा अभय अब न तो घर का रहा न घाट का
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117
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घाट घाट का पानी पीना
|
बहुत अनुभवी होना
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रघु को ठगना आसान नहीं, वह घाट घाट का
पानी पी चुका है
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118
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घुटना टेक देना
|
हार मान लेना
|
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से
परेशान होकर ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों के आगे घुटने टेक दिये
|
|
119
|
घुला घुला कर मारना
|
परेशान करके मारना
|
कठोरहृदया सास ने बेचारी रमा बहू को
घुला घुला कर मार डाला
|
|
120
|
घोड़ा बेचकर सोना
|
निश्चित होकर सोना
|
वह तो बिल्कुल बेखबर था, जैसे घोड़ा बेचकर
सोया हो
|
|
121
|
चंगुल में आना (पड़ना)
|
काबू में आना
|
उसे पहले मेरे चंगुल में पड़ने दो, फिर देखना कैसा
मजा चखाता हूँ
|
|
122
|
चडाल चौकड़ी
|
दुष्टों का दल, मनचलों का जमघट
|
वह तो अपनी चंडाल चौकड़ी में ही
मस्त है, मेरी क्या खाक सुनेगा ?
|
|
123
|
चक्कर में डालना
|
परेशान करना
|
उसने मुझसे रुपये लेकर मुझे चक्कर
में डाल दिया
|
|
124
|
चक्कर में आना
|
धोखा खाना
|
न जाने कैसे वह उस धूर्त के चक्कर
में आ गया
|
|
125
|
चकमा देना
|
ठगना
|
नंदलाल से सावधान रहना, वह तुम्हें भी चकमा
दे सकता है
|
|
126
|
चल निकलना
|
प्रसिद्ध होना, जम जाना
|
इन दिनों चुस्त पोशाक का फैशन खूब
चल निकला है
|
|
127
|
चाँदी काटना
|
खूब कमाना, मौज करना
|
गल्ले के व्यापार में वे खूब चाँदी
काट रहे हैं
|
|
128
|
चाँदी का जूता मारना
|
घूस देना
|
इस युग में जिसे भी चाँदी का जूता
मारोगे, वही तुम्हारा काम कर देगा
|
|
129
|
छाती पर मूंग दलना
|
किसी के सामने ही ऐसी बात कहना, जिससे उसका जी
दुखें
|
जितना जी चाहे मुझे सता लो, लेकिन मैं जबतक
जिंदा रहूँगी, तुम्हारी छाती पर मूंग दलती रहूँगी
|
|
130
|
छाती पर साँप लोटना
|
ईष्या या जलन होना
|
दूसरे की तरक्की देख्कर उसकी छाती
पर साँप लौटने लगता है
|
|
131
|
छान बीन करना
|
पूछताछ या जाँच करना
|
बहुत छान बीन करने पर भी पुलिस चोरी
का सुराग नहीं पा सकी
|
|
132
|
छीछालेदर करना
|
हँसी उड़ाना, दुर्गति करना
|
आज की सभा में रामदेव बाबू ने
नेताओं की खूब छीछालेदर की
|
|
133
|
छू मंतर होना
|
भाग जाना
|
पुलिस को देखते ही सारे जुआड़ी छू
मंतर हो गये
|
|
134
|
जंजाल में फसना
|
झंझट में पड़ना
|
बेचारा घर गृहस्थी के जंजाल में फस
गया है, अब भजन कीर्तन के लिए उसे समय कहाँ मिलता है
|
|
135
|
जख्म (जले ) पर नमक छिड़कना
|
दु:ख पर दु:ख देना
|
इन गरीबों पर और अत्याचार करके उनके
जख्म (जले) पर नमक मत छिडकी
|
|
136
|
जड़ उखाड़ना
|
समूल नाश करना
|
गाँधीजी के सत्याग्रह ने ब्रिटिश
साम्राज्य की भारत से जड़ उखाड़ दी
|
|
137
|
जबानी जमा खर्च करना
|
केवल बात करना, कुछ काम न करना
|
केवल जबानी जमा खर्च मत करो, कुछ काम भी किया
करो
|
|
138
|
जमीन आसमान एक करना
|
बहुत बड़े बड़े उपाय करना
|
चुनावों में सफलता पाने के लिए
उन्होंने जमीन आसमान एक कर दिया था
|
|
139
|
जमीन पर नाक रगड़ना
|
पछताना, माफी माँगना
|
आज चाहे जितना अकड़ लो कल तो जमीन
पर नाक रगड़ोगे ही
|
|
140
|
जमीन पर पैर न रखना
|
बहुत घमंड करना
|
आजादजी जब से मंत्री बने हैं, जमीन पर पैर नहीं
रखते
|
|
141
|
जलती आग में घी डालना
|
लड़ाई बढ़ाना
|
चैन सिंह को तो मुझसे पुरानी
दुश्मनी थी ही, लेकिन तुमने उसे इस बात की याद दिलाकर जलती आग में घी
डाल दिया है
|
|
142
|
जली कटी सुनाना
|
डॉट फटकार करना
|
गुस्सा तो मुझे बहुत दिनों से था, लेकिन कल ही वे
पकड़ में आये और मैंने उन्हें खूब जली कटी सुना दी
|
|
143
|
जहर का घूंट पीना
|
क्रोध को दबा लेना
|
उसके दुव्यवहार पर मुझे गुस्सा तो
बहुत आया, लेकिन परिस्थिति कुछ ऐसी थी कि जहर का घूंट पीकर रह जाना
पडा
|
|
144
|
जी की जी में रहना
|
इच्छा अधूरी रहना
|
मैंने अपने बेटे को खूब पढ़ाना
लिखाना चाहा था, लेकिन पैसे के अभाव में मेरी जी की जी में रह गयी
|
|
145
|
जी नहीं भरना
|
संतोष नहीं होना
|
धन चाहे जितना भी मिले, पर इससे किसी का
जी नहीं भरता
|
|
146
|
जी भर आना
|
दया होना
|
गरीबों को देखकर जिसका जी भर आये, वही सच्चा
महात्मा है
|
|
147
|
जीती मक्खी निगलना
|
सरासर बेईमानी करना
|
वह ऐसा घाघ है कि आँखों के सामने ही
जीती मक्खी निगल जाता है और किसी को पता तक नहीं चलता
|
|
148
|
जीवन दान बनना
|
जीवन की रक्षा करना
|
डॉक्टर की दवा रोगी के लिए जीवन दान
बन गयी
|
|
149
|
जूतियाँ सीधी करना
|
बहुत खुशामद करना
|
यदि तुम्हें उनसे अपना काम निकालना
है, तो उनकी जूतियाँ सीधी किया करो
|
|
150
|
जोर लगाना
|
बल प्रयोग करना
|
रावण ने बहुत जोर लगाया, लेकिन शिव धनुष
टस से मस न हुआ
|
|
151
|
झक मारना
|
विवश होना, व्यर्थ समय
बिताना
|
उसके पास मुझे सहायता के लिए झक
मारकर जाना पडा
|
|
152
|
झाँसा देना
|
धोखा देना
|
लखिया ने झाँसा देकर मेरे बेटे की
घड़ी हथिया ली
|
|
153
|
झाड़ फेरना
|
मान नष्ट करना
|
एक नीच आदमी से रिश्ता जोड़कर तुमने
पूरे परिवार की मर्यादी पर झाड़ फेर दिया है
|
|
154
|
झाड़ मारना
|
तिरस्कार करना, दूर हटाना – जरा सी बात पर
माँ ने उसे झाड़ मारकर बाहर निकाल दिया झूठ का पुल बाँधना
|
बहुत झूठ बोलना – सच्ची सच्ची बात
ही कह दो, अब झूठ का पुल बाँधने से क्या फायदा ?
|
|
155
|
टक्कर लेना
|
मुकाबला करना
|
तबला वादन में कंठे महाराज से टक्कर
लेना आसान नहीं था
|
|
156
|
टका सा जवाब देना
|
इनकार कर देना
|
मैं नौकरी के लिए बड़ी आशा लेकर गया
था, लेकिन सेठजी ने टका सा जवाब दे दिया
|
|
157
|
टका सा मुँह लेकर रह जाना
|
शर्मिदा होना
|
पिताजी के पहुँचते ही जुआरी गजाधर
टका सा मुँह लेकर रह गया
|
|
158
|
टट्टी की ओट में शिकार खेलना
|
छिपकर गलत काम करना
|
आजकल के नेता टट्टी की ओट में शिकार
खेलना खूब जानते हैं
|
|
159
|
टस से मस ना होना
|
थोड़ा सा भी न हिलना
|
उसे बहुत प्रलोभन दिया गया, लेकिन वह अपनी
बात से टस से मस न हुआ
|
|
160
|
टाएँ टाएँ फिस होना
|
असफल हो जाना
|
उसने योजना तो खूब सोच समझकर बनायी
थी, लेकिन वह टाएँ टाएँ फिस हो गयी
|
|
161
|
टाल मटोल करना
|
बहाने करना
|
अगर मेरे रुपये वापस करना है, तो कर दो, टाल मटोल करके
मुझे व्यर्थ परेशान मत करो
|
|
162
|
टूट पड़ना
|
वेग से धावा बोलना
|
शिवाजी के सैनिक अचानक बगल की
पहाड़ी से निकलकर मुगल फौज पर टूट पड़े
|
|
163
|
टाँग अड़ाना
|
दखल देना, अडचन डालना
|
हर बात में टाँग अडाना मूखों का ही
काम है
|
|
164
|
टेढ़ी उँगली से घी निकालना
|
आसानी से काम न होना
|
उससे कोई काम करवा लेना टेढ़ी ऊँगली
से घी निकालने जैसा ही है
|
|
165
|
टेढ़ी खीर होना
|
मुश्किल काम
|
इसे सही रास्ते पर लाना टेढ़ी खीर
है
|
|
166
|
ठंढा करना
|
शांत करना
|
पिताजी तो गुस्से से उबल रहे थे, बड़ी मुश्किल से
मैंने उन्हें समझा बुझाकर ठंढा किया है
|
|
167
|
ठंढा होना
|
शांत होना, मर जाना
|
शाइस्ता खाँ शिवाजी की चोट खाकर
थोडा छटपटाया फिर एकदम ठंढा हो गया
|
|
168
|
ठकुर सुहाती करना
|
मुँहदेखी करना, चापलूसी करना
|
अफसरों की ठकुर सुहाती करके सेठजी
ने काफी धन कमा लिया
|
|
169
|
ठनठन गोपाल होना
|
निर्धन होना
|
वह तो इन दिनों खुद ही ठनठन गोपाल
है, उससे चंदा पाने की आशा मत करो
|
|
170
|
ठोकर खाना
|
नुकसान सहना, मारा मारा फिरना
|
क्या ऐसे ही ठोकर खाते फिरोगे या
कुछ कमाने का भी उपाय करोगे ?
|
|
171
|
डंक मारना
|
कटु वचन कहना
|
उसने अपनी कड़वी बातों का ऐसा डक
मारा कि मैं मर्माहत होकर रह गया
|
|
172
|
डंके की चोट पर कहना
|
खुल्लम खुल्ला कहना
|
बात सच्ची थी तभी तो डके की चोट पर
कही गयी
|
|
173
|
डूबते को तिनके का सहारा होना
|
असहाय का कुछ भी सहारा होना
|
ऐसी विकट परिस्थिति में तुम्हारी यह
छोटी रकम भी डूबते को तिनके का सहारा होगी
|
|
174
|
डेढ़ चावल की खिचड़ी अलग पकाना
|
अपनी तुच्छ राय अलग रखना
|
यदि हम इसी प्रकार डेढ़ चावल की
खिचड़ी अलग पकाते रहे, तो हममें एकता कभी भी नहीं आयेगी
|
|
175
|
ढाई दिन की बादशाहत
|
क्षणिक सुख
|
यह ढाई दिन की बादशाहत भी किस काम ‘ की, जबकि तकदीर में
सारी जिंदगी दु:ख भोगना ही लिखा है
|
|
176
|
ढाक के तीन पात
|
सदा एक सा रहना
|
यह आदमी तरक्की करनेवाला नहीं है, जब भी मैंने देखा, इसे वही ढाक के तीन पात पाया
|
|
177
|
ढिंढोरा पीटना
|
सबको सुनाना
|
उसने हमारी बातें सुन ली हैं, अब पूरे गाँव में
ढिंढोरा पीटता फिरेगा
|
|
178
|
ढेर करना
|
मार डालना
|
बलराम ने गदा की एक ही चोट से दुष्ट
राक्षस को वहीं ढेर कर दिया |
|
|
179
|
तकदीर चमकना
|
भले दिन आना
|
बेटे की नौकरी क्या मिली, राम बाबू की
तकदीर चमक गयी
|
|
180
|
तख्ता उलटना
|
बना बनाया काम बिगाड़ना
|
इस व्यवसाय में मैंने अच्छा कमाया
था, लेकिन गेहूँ का सौदा करके तुमने मेरा तख्ता उलट दिया
|
|
181
|
तबीयत फड़क उठना
|
चित्त प्रसन्न हो जाना
|
पंकज उदास की गजल सुनकर मेरी तबीयत
फड़क उठी
|
|
182
|
तलवार के घाट उतारना
|
हत्या कर देना
|
उस वीर ने अत्याचारी को अपनी तलवार
के घाट उतार दिया
|
|
183
|
तलवे धो धोकर पीनां
|
बहुत अधिक खुशामद करना
|
वह सेठजी के तलवे धो धोकर पीता रहा, लेकिन बदले में
उसे गालियाँ ही मिलीं
|
|
184
|
ताक में रहना
|
मौका देखते रहना
|
तुम सावधान रहना, इन दिनों वह
तुम्हारी ही ताक में रहता है
|
|
185
|
ताना मारना
|
व्यंग्य करना
|
मेरी गरीबी पर वह नीच हमेशा ताना
मारा करता है
|
|
186
|
तारे गिनना
|
चिंता में रात काटना
|
आपके इंतजार में मैं सारी रात तारे
गिनता रहा
|
|
187
|
तारे तोड़ लाना
|
असंभव काम करना
|
साहसी व्यक्ति सहज ही तारे तोड लाते
हैं
|
|
188
|
तिनके का सहारा
|
थोड़ा सा सहारा
|
मुझ जैसे गरीब को तो तिनके का सहारा
भी बहुत होता है
|
|
189
|
तिल का ताड़ कर देना
|
बहुत बढ़ा चढ़ाकर कहना
|
जितनी बात हुई उतनी ही कहो, तिल का ताड मत
करो
|
|
190
|
त्राहि त्राहि करना
|
रक्षा के लिए गुहार करना
|
जमींदारों के अत्याचार से किसान
त्राहि त्राहि कर रहे थे
|
|
191
|
थुड़ी थुड़ी करना
|
धिक्कारना
|
उसके ऐसे नीच कर्म पर सभी थुड़ी
थुड़ी कर रहे थे
|
|
192
|
थू थू करना
|
धिक्कारना
|
तुम्हारी नीचता की कहानी जो भी
सुनेगा वही तुम पर थू थू करेगा
|
|
193
|
थूककर चाटना
|
वादा से मुकर जाना
|
तुम्हारे जैसे आदमी का क्या विश्वास? तुम तो थूककर
चाटने लगते हो
|
|
194
|
थूक से सत्तू सानना
|
बहुत कंजूसी करना
|
रामजीवन से चंदा पाने की उम्मीद मत
रखो, वह हमेशा थूक से सत्तू सानता है
|
|
195
|
थोथी बात होना
|
सारहीन बात होना
|
ये सब थोथी बातें हैं, इन पर कोई भी
विश्वास नहीं करेगा
|
|
196
|
दबी जबान से कहना
|
धीरे धीरे कहना
|
नौकर ने अपनी बात मालिक से दबी जबान
से कह दी
|
|
197
|
दम भरना
|
भरोसा करना, हर समय किसी की
तारीफ करना
|
वह तो हमेशा तुम्हारी दोस्ती का दम
भरा करता था
|
|
198
|
दर दर मारा फिरना
|
दुर्दशाग्रस्त होकर घूमना
|
याद रखो, यदि यह नौकरी
तुमने छोड़ दी, तो तुम्हें जिंदगी भर दर दर मारे फिरना होगा
|
|
199
|
दलदल में फसना
|
मुश्किल में पड़ना
|
मैं उस बदमाश की जमानत देकर दलदल
में फंस गया
|
|
200
|
दाँतों उँगली दबाना (दाँत तले उँगली
दबाना)
|
आश्चर्य करना, अफसोस करना
|
इस बच्चे की बातें सुनकर तो दाँतों
उँगली दबाना पड़ता है
|
|
201
|
दाँतकटी रोटी होना
|
गहरी दोस्ती होना
|
नरेश और मोहन में आजकल दाँतकटी रोटी
जैसा सम्बन्ध है
|
|
202
|
दाँत तोड़ना
|
परास्त करन
|
मुझसे ज्यादा उलझने की कोशिश करोगे
तो मैं तुम्हारे दाँत तोड़ डालूँगा
|
|
203
|
दाँतों में तिनका लेना
|
अधीनता स्वीकार करना
|
वीर शिवाजी के वहाँ पहुँचते ही उस
किले का रक्षक दाँतों में तिनका लेकर उनके सामने उपस्थित हुआ
|
|
204
|
दाई से पेट छिपाना
|
ऐंसी जगह भेद छिपाना जहाँ ऐसा करना
संभव नहीं हो
|
उसने अपना भेद मुझसे कह ही दिया, भला कब तक दाई से
पेट छिपाता ?
|
|
205
|
दाना पानी उठना
|
अन्न जल न मिलना
|
जब से बाबू साहब की मौत हुई है, बेचारे रघुआ का
इस घर से दाना पानी उठ गया
|
|
206
|
दाने दाने को मुँहताज
|
भोजन न पाना, अत्यंत दरिद्र
|
नौकरी से हटा दिये जाने पर तो मैं
दाने दाने को मुँहताज हो जाऊँगा
|
|
207
|
दाल गलना
|
मतलब निकलना
|
चाहे तुम कुछ भी करो, यहाँ तुम्हारी
दाल गलने वाली नहीं है
|
|
208
|
दाल भात का कौर समझना
|
बहुत आसान समझना
|
इस काम को तुम, दाल भात का कौर
मत समझ लेना
|
|
209
|
दाल में काला होना
|
संदेह की बात होना
|
तुम्हारे रंग ढंग से लगता है कि
जरूर दाल में कुछ काला है
|
|
210
|
दिन दूना रात चौगुना होना (या
बढ़ना)
|
खूब तरक्की करना
|
भाई, जब से तुमने गल्ले का व्यापार शुरू
किया है, दिन दूना रात चौगुना होते जा रहे हो
|
|
211
|
दिल के फफोले फोड़ना
|
मन की भडास निकालना
|
साहब बीबी से झगड़कर आये थे, घर में तो चली
नहीं, मुझ पर ही बिगड़कर अपने दिल के फफोले फोड़ रहे
थे
|
|
212
|
दिल्ली दूर होना
|
लक्ष्य दूर होना
|
अभी तो मैट्रिक की परीक्षा में ही
उत्तीर्ण हुए हो और मजिस्ट्रप्टे बनने का सपना देख रहे हो, अभी दिल्ली दूर
है
|
|
213
|
दीन दुनिया भूल जान
|
सुध बुध भूल जाना
|
सच्चे महात्मा ईश्वर की साधना में
डूबकर दीन दुनिया भूल जाते हैं
|
|
214
|
दीया लेकर ढूँढना
|
हैरान होकर ढूँढना
|
उसके जैसा ईमानदार नौकर तो दीया
लेकर ढूँढने से भी नहीं मिलेगा
|
|
215
|
दुनिया की हवा लगना
|
सांसारिक अनुभव होना
|
जब से जुगल को दुनिया की हवा लगी है, वह मितव्ययी हो
गया है
|
|
216
|
दुम दबाकर भागना
|
कायरतापूर्वक भागना
|
वह बहुत देर से शेखी बघार रहा था, लेकिन जैसे ही
वहाँ मेरे आदमी पहुँचे, दुम दबाकर भाग
गया
|
|
217
|
दूज (ईद) का चाँद होना
|
मुश्किल से दिखाई देना
|
यार तुम्हें देखने को तरस गया, तुम तो दूज (ईद)
के चाँद हो गये हो
|
|
218
|
दूध का दूध पानी का पानी करना
|
पक्षपातरहित न्याय करना
|
महाराज हरिश्चंद्र ऐसे न्यायी थे कि
चाहे जैसा भी झगड़ा हो, क्षणभर में दूध का दूध
पानी का पानी कर देते थे
|
|
219
|
दूध की लाज रखना
|
माँ की प्रतिष्ठा रखना
|
युद्ध में जाते समय बेटे को
आशीर्वाद देते हुए माँ ने कह, बेटा, लडाई में जीतकर मेरे दूध की लाज
रखना
|
|
220
|
दूध की नदियाँ बहाना
|
संपन्नता की भरमार होना
|
प्राचीन भारत में दूध की नदियाँ
बहती थी
|
|
221
|
दूध के दाँत न टूटना
|
अनुभवहीन होना
|
तुम तो कभी कभी ऐसी बातें करने लगते
हो जिनसे लगता है कि अभी तक तुम्हारे दूध के दाँत न टूटे हों
|
|
222
|
दूधो नहाओ, पूतों फलो
|
धन और संतान की वृद्धि होना
|
बहू ने जैसे ही सास के पाँव छूए, उसने आशीर्वाद
दिया दूधी नहाओं, पूतों फलो
|
|
223
|
दो दिन का मेहमान
|
शीघ्र ही मरनेवाला, या कहीं बाहर
जानेवाला
|
चाचाजी की बीमारी बहुत बढ़ गयी है, अब तो वे दो दिन
के मेहमान हैं
|
|
224
|
दो नावों पर पैर रखना
|
दो विरोधी काम एकसाथ करना
|
दो नावों पर पैर रखना सफलता से दूर
भागना है
|
|
225
|
द्रविड़ प्राणायाम करना
|
सीधी बात को घुमा फिराकर कहना
|
जो कुछ कहना है सीधे सीधे कहो, द्राविड
प्राणायाम मत करो
|
|
226
|
धक्का लगना
|
नुकसान होना, दु:ख होना
|
पिछले साल जूट के व्यापार में
लालाजी को गहरा धक्का लगा था
|
|
227
|
धज्जियाँ उड़ाना
|
दुर्गति करना, दोष दिखाना
|
शशि बाबू ने उस धोखेबाज की ऐसी
धज्जियाँ उड़ायीं कि वह अपना सा मुँह लेकर रह गया
|
|
228
|
धता बताना
|
टाल देना
|
मैं सहायता की आशा लेकर नेताजी के
पास गया था, परंतु उन्होंने तो मुझे धता बता दिया
|
|
229
|
धरना देना
|
सत्याग्रह करना
|
आँदोलनकारी कर्मचारी मंत्रीजी के कार्यालय
के सामने धरना दे रहे हैं
|
|
230
|
धुएँ के बादल उड़ाना
|
भारी गप हाँकना
|
उसका विश्वास कभी मत करना, धुएँ के बादल
उड़ाने में वह माहिर है
|
|
231
|
धुन सवार होना
|
किसी काम को पूरा करने की लगन होना
|
इन दिनों परमेश्वर बाबू पर पैसा
कमाने की धुन सवार हो गयी है
|
|
232
|
धूप में बाल सफेद करना
|
अनुभवहीन होना
|
अफसोस है कि तुम्हें इस उम्र में भी
इन बातों की जानकारी नहीं है, तुमने क्या धूप में बाल सफेद किये
हैं ?
|
|
233
|
धूल फाँकना
|
मारा मारा फिरना
|
पढ़ाई लिखाई छोड़कर रवींद्र इधर उधर
की धूल फाँका करता है
|
|
234
|
धूल में मिलना
|
बर्बाद हो जाना
|
अपने से ताकतवर के साथ टकरानेवाले
धूल में मिल जाते हैं
|
|
235
|
धोती ढीली होना
|
डर जाना
|
नये नये शिकारी का जैसे ही बाघ से
सामना हुआ, उसकी धोती ढ़ीली हो गयी
|
|
236
|
धोबी का कुत्ता
|
बेकार आदमी
|
उसकी बात मत पूछो, वह तो धोबी का
कुत्ता है, किसी काम का नहीं
|
|
237
|
नजर पर चढ़ना
|
पसंद आ जाना
|
लगता है तुम्हारा छाता चोर की नजर
पर चढ़ गया था
|
|
238
|
नमक मिर्च लगाना
|
किसी बात को खूब बढ़ा चढ़ाकर कहना
|
उसने खूब नमक मिर्च लगाकर मेरी
शिकायत पिताजी से की है
|
|
239
|
नाक कट जाना
|
प्रतिष्ठा नष्ट होना
|
तुम्हारी चोरी की इस करतूत से
परिवार की नाक कट गयी
|
|
240
|
नाक का बाल होना
|
बहुत प्रिय होना
|
अपनी चतुराई के कारण ही बीरबल अकबर
की नाक के बाल हो गये थे
|
|
241
|
नाकों चने चबवा देना
|
खूब परेशान करना
|
वीर शिवाजी ने छापामार युद्ध करके
औरंगजेब को नाकों चने चबवा दिये थे
|
|
242
|
नाक भौं चढ़ाना
|
नाराज होना, घृणा प्रकट करना
|
गंदगी को देखकर सभी नाक भौं चढ़ाने
लगते हैं
|
|
243
|
नाक में दम करना
|
खूब तंग करना
|
अपनी शैतानियों से तो इसने मेरी नाक
में दम कर दिया है
|
|
244
|
नाक रगड़ना
|
गिड़गिड़ाना, विनती करना
|
तुम लाख नाक रगड़ो, लेकिन इस बार मैं
तुम्हें माफ नहीं करूंगा
|
|
245
|
नानी याद आना
|
होश उड़ जाना, हौसला पस्त होना
|
पुलिस को देखते ही चोरों को नानी
याद आ गयी
|
|
246
|
नीचा दिखाना
|
अपमानित करना
|
आज उसने सबके सामने ही मुझे नीचा
दिखाया है
|
|
247
|
नीला पीला होना
|
क्रोध करना
|
छोटी छोटी बातों के लिए बच्चों पर
नीला पीला मत हुआ करो
|
|
248
|
नौ दो ग्यारह होना
|
भाग जाना
|
वह बदमाश मेरी गठरी लेकर नौ दो
ग्यारह हो गया
|
|
249
|
पंचतत्व को प्राप्त करना
|
मृत्य होना
|
30 जनवरी, 1948 ई० को गाँधीजी ने पंचतत्व को प्राप्त किया था
|
|
250
|
पगड़ी उछालना
|
बेइज्जत करना, हँसी उड़ाना
|
तुमने कल सबके सामने मेरी पगडी
उछाली है, इसका बदला मैं तुमसे जरूर लूँगा
|
|
251
|
पगड़ी रखना
|
मर्यादा की रक्षा करना
|
भाई ऐसी हालत में तुम्हीं मेरी
पगड़ी रख सकते हो, नहीं तो मैं किसी को मुँह दिखाने लायक नहीं रहूँगा
|
|
252
|
पत्थर की लकीर
|
अमिट, स्थायी
|
मेरी बात को पत्थर की लकीर समझो
|
|
253
|
पत्थर पर दूब जमना
|
अनहोनी बात या असंभव काम होना
|
उस कजूस ने जब चंदा में एक सौ एक
रुपये दे दिये तो लगा कि जैसे पत्थर पर दूब जम आयी है
|
|
254
|
पत्थर से सिर फोड़ना
|
असंभव बात के लिए कोशिश करना
|
उस मूख को समझाने की कोशिश करके
क्यों पत्थर से सिर फोड़ रहे हो ?
|
|
255
|
पहाड़ से टक्कर लेना
|
जबर्दस्त से मुकाबला करना
|
काले खाँ पहलवान से भिड़ना पहाड़ से
टक्कर लेना है
|
|
256
|
पाँव उखड़ जाना
|
हार जाना
|
हमारे जवानों की ललकार सुनते ही
पाकिस्तानी घुसपैठियों के पाँव उखड़ गये
|
|
257
|
पाँव फूंक फूंक कर रखना
|
सोच समझकर काम करना
|
जवानी अंधी हाती है, अत: इस अवस्था
में पाँव फूंक फूंक कर रखना चाहिए
|
|
258
|
पजामे से बाहर होना
|
कुद्ध होना, जोश में आना
|
नौकर ने चाय लाने में जरा देर क्या
कर दी साहब पाजामें से बाहर हो गये
|
|
259
|
पानी की तरह पैसा बहाना
|
अंधाधुंध खर्च करना
|
मुफ्त की दौलत मिल गयी है तभी तो वह
पानी की तरह पैसा बहा रहा है
|
|
260
|
पानी पानी होना
|
लज्जित होना
|
शराब पीते हुए अचानक अपने पिता
द्वारा देख लिये जाने पर बेचारा दामोदर पानी पानी हो गया
|
|
261
|
पानी में आग लगाना
|
असंभव को संभव करना
|
उन दोनों की पक्की दोस्ती में फूट
डालकर तुमने पानी में आग लगा दी है
|
|
262
|
पिल पड़ना
|
जी जान से लग जाना
|
परीक्षा में प्रथम स्थान पाने के
लिए सौमित्र अपने अध्ययन में पिल पड़ा है
|
|
263
|
पीठ ठोंकना
|
शाबाशी देना, बढ़ावा देना
|
परीक्षा में प्रथम आने पर पिताजी ने
मेरी पीठ ठोंकी
|
|
264
|
पीठ दिखाना
|
लड़ाई में भाग जाना
|
थोड़ी देर की लड़ाई के बाद शत्रु ने
पीठ दिखा दी
|
|
265
|
पेट में चूहे दौड़ना
|
जोरों की भूख लगना
|
माँ, जल्दी से कुछ खाने को दो, पेट में चूहे
दौड़ रहे हैं
|
|
266
|
पौ बारह होना
|
लाभ का अवसर मिलना
|
इस वर्ष सब्जियों के दाम में तेजी
आने के करण किसानों के पौ बारह हैं
|
|
267
|
प्राण मुँह को आना
|
अत्यधिक कष्ट होना
|
जंगल में अचानक शेर की दहाड सुनते
ही मेरे प्राण मुँह को आ गले
|
|
268
|
प्राणों से हाथ धोना
|
मर जाना
|
यदि मुझसे दुश्मनी करोगे तो प्राणों
से हाथ धोना पडेगा
|
|
269
|
प्राण हथेली में लेना
|
मरने के लिए तैयार रहना
|
बहादुर हर समय प्राण हथेली में लिये
फिरते हैं
|
|
270
|
प्राणों की बाजी लगाना
|
अत्यधिक साहस करना
|
भारत के प्रहरी सैनिक देश रक्षा में
प्राणों की बाजी लगा देते हैं
|
|
271
|
पोल खोलना
|
रहस्य प्रकट करना
|
आखिर एक दिन उनके नौकर ने ही यह पोल
खोल दी कि नेताजी के पास इतना पैसा कहाँ से आता है
|
|
272
|
फंदे में पड़ना
|
धोखे में पड़ना
|
तुम लाख प्रलोभन दो, लेकिन अत मैं
तुम्हारे फदे में नहीं पड़नेवाला
|
|
273
|
फटेहाल होना
|
बुरी हालत में होना
|
नौकरी छूट जाने के कारण इन दिनों वह
फटे हाल हो गया है
|
|
274
|
फूंक से पहाड़ उड़ाना
|
थोडी शक्ति से बड़ा काम करना
|
अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश को
चुनौती देकर इराक फुक से पहाड़ उड़ाना चाहता है
|
|
275
|
फूटी आँखों न भाना
|
अप्रिय लगना
|
तुम्हारी हर समय उधार माँगने की आदत
मुझे फूटी आँखों भी नहीं भाती है
|
|
276
|
फूलकर कुप्पा होना
|
खुशी से इतराना
|
जब शिक्षक ने चंदन की प्रशंसा की तो
वह फूलकर कुप्पा हो गया
|
|
277
|
फेर में डालना
|
कठिनाई में डालना
|
उसने चुनाव में खड़ा करके मुझे बड़े
फेर में डाल दिया है
|
|
278
|
बगलें झाँकना
|
लज्जित होकर इधर उधर देखना
|
पिता जी से रंगे हाथो चोरी करते
पकडे जाने पर वह बगले झाकने लगा
|
|
279
|
बट्टा लगाना
|
कलंक लगाना
|
अपना वचन तोड़कर तुमने क्षत्रियों
के नाम पर बट्टा लगा दिया
|
|
280
|
बरस पड़ना
|
क्रोध में आकर खरी खोटी सुनाना
|
बच्चों की छोटी छोटी भूल पर भी बरस
पड़ना बुरी बात है
|
|
281
|
बाग बाग होना
|
बहुत खुश होना
|
‘तीसरी कसम’ फिल्म में राजकपूर का अभिनय देखकर
तबीयत बाग बाग हो गयी
|
|
282
|
बाजी ले जाना
|
आगे निकल जाना
|
कल के फुटबॉल मैच में अपने कॉलेज की
टीम बाजी ले गयी
|
|
283
|
बात चलाना
|
शुरू करना
|
इन दिनों मेरी बहन की शादी की बात
चलायी जा रही है
|
|
284
|
बातों में आना
|
बात व्यवहार में धोखा खाना
|
न जाने उस समय मेरी बुद्धि को क्या
हो गया था जो मैं उसकी बातों में आ गया
|
|
285
|
बाल बाँका न होना
|
कुछ भी हानि न पहुँचना
|
तुम्हारे आशीवाद से इस लड़ाई में
मेरा बाल बाँका न होगा
|
|
286
|
बाल की खाल निकालना
|
निरर्थक बहस करना
|
हर बात में बाल की खाल निकालने की
तुम्हारी तो आदत ही है
|
|
287
|
बासी कढ़ी में उबाल आना
|
बुढ़ापे में जवानी की उमंग उठना, समय बीत जाने पर
कुछ करने की इच्छा होना
|
बूढ़े चट्टोपाध्याय महोदय का इस तरह
से बनना सँवरना देखकर यही लगता है कि बासी कढ़ी में उबाल आ गया है
|
|
288
|
बीड़ा उठाना
|
किसी काम को पूरा करने का संकल्प
करना
|
भगवान राम ने सुग्रीव की रक्षा का
बीड़ा उठाया था
|
|
289
|
बुखार उतारना
|
क्रोध करना
|
बहुत मनमानी करने लगे हो, ऐसी मार मारूंगी
कि बुखार उतार दूंगी
|
|
290
|
बेड़ा पार लगाना
|
कष्ट से उबारना
|
भगवान सबका बेड़ा पार लगाते हैं
|
|
291
|
बे सिर पैर की बात कहना
|
निरर्थक बात कहता
|
कुछ सोच समझकर बोला करो, बे सिर पैर की
बात कहने से क्या फायदा ?
|
|
292
|
बेवक्त की शहनाई बजाना
|
अवसर के विरुद्ध काम करना
|
पूजा के अवसर पर फिल्मी गीत सुनाकर
कुछ लोग बेवक्त की शहनाई बजाते हैं
|
|
293
|
बोलती बंद करना
|
निरुतर करना, बोलने न देना
|
सबके सामने पोल खोलकर शरत ने उसकी
बोलती बंद कर दी
|
|
294
|
बौछार करना
|
अधिक मात्रा में उपस्थित करना
|
पुलिस ने भीड़ पर गोलियों की बौछार
कर दी
|
|
295
|
भंडा फूटना
|
भेद खुलना –
|
एक न एक दिन तुम्हारे कुकर्मों का
भंडा फूटेगा और तब लोग तुम पर थूकेंगे
|
|
296
|
भानुमती का पिटारा
|
वह पात्र, जिसमें तरह तरह
की चीजें मौजूद रहती हैं
|
दादी के पास तो मानो भानुमती का
पिटारा है, उनकी दवा पीते ही मुन्ना उछलने कूदने लगा
|
|
297
|
भार उठाना
|
उत्तरदायित्व लेना
|
इतने बड़े अनुष्ठान का भार उठाना एक
अकेले के बस का नहीं है
|
|
298
|
भार उतारना
|
ऋण से मुक्त होना
|
भतीजी की शादी होते ही मेरे सिर से
एक भार उतर जायगा
|
|
299
|
भूत सवार होना
|
सनक सवार होना
|
क्या तुम पर भूत सवार हो गया है, जो बच्ची को इस
तरह पीट रहे हो ?
|
|
300
|
भौंह चढ़ाना
|
क्रोध करना
|
वह स्वभाव से ही क्रोधी है, छोटी छोटी बातों
पर भी भौंह चढ़ा लेगा
|
|
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